महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार की मौत: हादसा या साजिश? संपत्ति विवाद से लेकर राजनीतिक दुश्मनियों तक की पड़ताल

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार की मौत: हादसा या साजिश? संपत्ति विवाद से लेकर राजनीतिक दुश्मनियों तक की पड़ताल

लखनऊ/मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सनसनीखेज घटना ने हलचल मचा दी है। उप मुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख अजीत पवार की बुधवार सुबह एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई। 66 वर्षीय पवार मुंबई से बारामती जा रहे थे, जब उनका लीर्जेट 45 विमान (रजिस्ट्रेशन VT-SSK) बारामती हवाई अड्डे पर लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में पवार समेत पांच अन्य लोगों की मौत हो गई। इस दुःखद घटना की जानकारी मिलने पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेताओं ने शोक व्यक्त किया है।


यह दुर्घटना महाराष्ट्र की राजनीति की उन रहस्यमयी मौतों की श्रृंखला में नया अध्याय जोड़ती है, जहां प्रमोद महाजन और गोपीनाथ मुंडे जैसी हस्तियों की मौतों को हमेशा साजिश से जोड़ा जाता रहा है। पवार की मौत के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं: क्या यह महज हादसा था या राजनीतिक साजिश? उनकी अपार संपत्ति, पुरानी दुश्मनियां और हालिया राजनीतिक उथल-पुथल ने इन अटकलों को हवा दी है।

दुर्घटना की डिटेल्स: क्या था हादसे का कारण?

विमान वीएसआर वेंचर्स द्वारा संचालित था, जिसका 2023 में भी एक लैंडिंग मिशैप हुआ था। अधिकारियों के अनुसार, विमान बारामती में चुनावी अभियान के लिए जा रहा था। दुर्घटना के बाद शवों को बारामती मेडिकल कॉलेज लाया गया। जांच एजेंसियां जैसे डीजीसीए और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन शुरुआती रिपोर्ट्स में तकनीकी खराबी का संकेत है। हालांकि, सोशल मीडिया पर यूजर्स इसे साजिश बता रहे हैं, कुछ पोस्ट्स में इसे बिपिन रावत की हेलीकॉप्टर दुर्घटना से जोड़ा जा रहा है।

संपत्ति विवाद: हजार करोड़ की दौलत और बेनामी सम्पतियों का आरोप
पवार की मौत से पहले उनकी संपत्ति हमेशा सुर्खियों में रही। 2021 में आयकर विभाग ने पवार और उनके परिवार से जुड़ी 1,000 करोड़ रुपये की संपत्तियों को बेनामी संपत्ति के आरोप में सीज किया था।विभाग ने दावा किया था कि ये संपत्तियां बेनामी थीं, लेकिन दिसंबर 2024 में अपीलेट ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद सभी संपत्तियां क्लियर कर दी गईं। चुनावी हलफनामे में पवार ने अपनी संपत्ति 45 करोड़ रुपये बताई थी, लेकिन विरोधी दलों ने हमेशा दावा किया कि उनके पास 70 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की बेनामी संपत्ति है। हाल ही में पवार ने खुद एक रैली में कहा था, “मुझ पर 70 हजार करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया गया, लेकिन आरोप से कोई दोषी नहीं होता।
यह संपत्ति विवाद पवार की राजनीतिक छवि का हिस्सा रहा। सिंचाई घोटाले से जुड़े आरोपों पर भी सफाई मिल चुकी है, लेकिन विरोधी इसे राजनीतिक हथियार बनाते रहे। मौत के बाद ये विवाद फिर उभरे हैं, जहां लोग पूछ रहे हैं कि क्या संपत्ति को लेकर कोई साजिश थी?

राजनीतिक दुश्मनियां: शिवसेना, बीजेपी या पार्टी के अंदर?
महाराष्ट्र की राजनीति में पवार की भूमिका हमेशा विवादास्पद रही। 2019 में उन्होंने बीजेपी के साथ सरकार बनाई, फिर चाचा शरद पवार की एनसीपी से अलग होकर महायुति गठबंधन में शामिल हुए। हाल ही में संजय राउत ने दावा किया था कि पवार महायुति छोड़कर महा विकास अघाड़ी में शामिल हो सकते हैं। पवार ने खुद बीजेपी पर सत्ता और पैसे की भूख का आरोप लगाया था।

सोशल मीडिया पर यूजर्स उनके दुश्मनों की लिस्ट बना रहे हैं:

पुरानी शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट), नई शिवसेना (एकनाथ शिंदे), बीजेपी नेता, या खुद एनसीपी के अंदर के रिश्तेदार। शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी ने मौत पर दुख जताते हुए इसे बेहद दर्दनाक बताया। लेकिन कुछ पोस्ट्स में इसे अंतरराष्ट्रीय साजिश से भी जोड़ा जा रहा है, जैसे होमी भाभा की मौत।

महाराष्ट्र की राजनीति में मौतों का सिलसिला: महाजन और मुंडे की याद
यह पहली बार नहीं जब महाराष्ट्र में किसी बड़े नेता की मौत पर साजिश के सवाल उठे हैं। 2006 में बीजेपी नेता प्रमोद महाजन को उनके भाई प्रवीण ने गोली मार दी, लेकिन हाल ही में उनकी बेटी पूनम महाजन ने इसे साजिश बताते हुए जांच की मांग की। 2014 में गोपीनाथ मुंडे की कार दुर्घटना में मौत हुई, जिसे सीबीआई ने हादसा बताया, लेकिन उनके भतीजे ने साजिश का शक जताया था । क्योंकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दिल का दौरा बताया गया, लेकिन कांस्पिरेसी थियरीज आज भी जारी हैं।
इन मौतों की तरह पवार की मौत पर भी जांच होगी, लेकिन शक की आंच बनी रहेगी। अब लोग अब हमदर्दी कम, दुश्मनों की तलाश ज्यादा कर रहे हैं।
आगे क्या? जांच और राजनीतिक प्रभाव
पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उच्च स्तरीय जांच का आदेश दिया है। एनसीपी में उत्तराधिकार पर सवाल उठ रहे हैं, जहां रोहित पवार जैसे युवा चेहरे आगे आ सकते हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में यह मौत एक बड़ा शून्य छोड़ गई है, लेकिन साजिश के सवालों का जवाब जांच से मिलेगा या नहीं, यह समय बताएगा।

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