प्यार, राजनीति और पोस्ट: प्रतीक–अपर्णा के रिश्ते में दरार की पूरी कहानी

प्यार, राजनीति और पोस्ट: प्रतीक–अपर्णा के रिश्ते में दरार की पूरी कहानी

एक इंस्टाग्राम पोस्ट… कुछ लाइनें… और यूपी के एक सबसे चर्चित राजनीतिक परिवार की निजी ज़िंदगी सवालों के घेरे में आ गई। सैफई से लखनऊ और राजनीति के गलियारों तक पहचाने जाने वाले प्रतीक यादव और अपर्णा यादव का रिश्ता आज चर्चा का विषय है। वजह कोई चुनावी फैसला नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर लगाए गए गंभीर आरोप हैं, जिनके बाद यह रिश्ता अब टूटने की कगार पर बताया जा रहा है। सोमवार की सुबह अचानक प्रतीक यादव का एक इंस्टाग्राम पोस्ट सामने आया। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा कि उनकी मानसिक हालत बहुत खराब है,

लेकिन उनकी पत्नी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने अपर्णा पर आरोप लगाया कि वह सिर्फ मशहूर और ताकतवर बनना चाहती हैं। इस एक पोस्ट ने राजनीति, परिवार और निजी जीवन—तीनों को झकझोर कर रख दिया। बताया जा रहा है कि इसी दिन रात में प्रतीक यादव ने एक और पोस्ट शेयर की। इसमें उन्होंने और भी कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने दावा किया कि अपर्णा ने उनका रिश्ता मां, पिता और भाई के साथ तोड़ दिया। उन्होंने लिखा कि अपर्णा सिर्फ प्रसिद्धि चाहती हैं और अपने स्वार्थ के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। प्रतीक ने यहां तक कहा कि वह अपने बच्चे की कसम खाकर ऐसा कह रहे हैं और अपर्णा उनके जीवन का सबसे बड़ा झूठ बोलने वाला और सबसे स्वार्थी इंसान हैं। इन पोस्ट्स के सामने आने के बाद सवाल यह उठता है कि क्या यह सब अचानक हुआ है या इसके पीछे सालों का पारिवारिक और राजनीतिक तनाव है। दरअसल, प्रतीक और अपर्णा की मुलाकात की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। साल 2001 में लखनऊ के एक कार्यक्रम में पहली बार दोनों मिले। उस समय अपर्णा काफी छोटी थीं, लेकिन उन्हें गाने का शौक था। मंच पर उनका गाना सुनकर प्रतीक प्रभावित हो गए। इसके बाद दोनों की मुलाकात एक शादी समारोह में हुई और बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। धीरे-धीरे ईमेल के जरिए दोस्ती बढ़ी, फिर प्यार हुआ और प्यार का इजहार भी ईमेल से ही किया गया। कई सालों तक रिश्ते की नींव मजबूत होने के बाद 2011 में दोनों परिवारों की सहमति से शादी तय हुई और 2012 में सैफई में धूमधाम से शादी हुई। इस शादी में कई राजनीतिक और फिल्मी हस्तियां भी शामिल हुईं। शादी के बाद जिंदगी सामान्य लग रही थी, लेकिन मोड़ तब आया जब अपर्णा यादव ने राजनीति में कदम रखा। 2017 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर लखनऊ कैंट से चुनाव लड़ा और हार का सामना किया। इसके बाद 2022 में जब सपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया, तो उन्होंने भाजपा जॉइन कर ली। यहीं से परिवार में खटास की शुरुआत मानी जाती है। मुलायम सिंह यादव समाजवादी पार्टी के संस्थापक थे और उनका पूरा परिवार सपा से जुड़ा रहा है। ऐसे में बहू का भाजपा में जाना सबको रास नहीं आया। कई जानकार मानते हैं कि अपर्णा के राजनीतिक कदमों का असर प्रतीक पर भी पड़ा और वे धीरे-धीरे सैफई परिवार से दूरी बनाने लगे। प्रतीक यादव खुद राजनीति से दूर रहे। वे हमेशा निजी जीवन और फिटनेस को महत्व देते रहे। मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद प्रतीक और ज्यादा चुप हो गए। वहीं अपर्णा यादव लगातार राजनीति में सक्रिय रहीं और महिला आयोग की उपाध्यक्ष के रूप में भी सुर्खियों में रही। कई लोग मानते हैं कि यही असंतुलन—एक तरफ राजनीति और पहचान की चाह, दूसरी तरफ शांत और निजी जीवन—इस रिश्ते में दरार की मुख्य वजह बन गया। हालांकि यह याद रखना जरूरी है कि सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर यह तय करना सही नहीं होगा कि दोनों का तलाक हो चुका है। जब तक प्रतीक यादव और अपर्णा यादव खुद मीडिया के सामने या कानूनी तौर पर कोई आधिकारिक बयान नहीं देते, तब तक इसे एक गंभीर पारिवारिक विवाद के रूप में ही देखा जाना चाहिए। अब सवाल यह है कि आगे क्या होगा और सच सामने कब आएगा। यही वक्त बताएगा कि यह रिश्ता कैसे विकसित होता है।

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